“हमारी मंज़िल बच्चों की मुस्कान, उनका आत्मविश्वास, उनकी सफलता और उनका उज्ज्वल भविष्य है। यही हमारा उद्देश्य है — और इस मंज़िल तक पहुँचने से हमें कोई भी चुनौती रोक नहीं सकती।” — बोले आधारशिला स्कूल के अध्यापक
“कोहरे की ताक़त सिर्फ़ रास्ते धुंधले करना है… मंज़िल नहीं।” ■■ “हमारी मंज़िल बच्चों की मुस्कान, उनका आत्मविश्वास, उनकी सफलता और उनका उज्ज्वल भविष्य है। यही हमारा उद्देश्य है — और इस मंज़िल तक पहुँचने से हमें कोई भी चुनौती रोक नहीं सकती।” — बोले आधारशिला स्कूल के अध्यापक आधारशिला स्कूल के पहली और दूसरी कक्षा के अध्यापकों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि शिक्षक होने के नाते उनका संकल्प बच्चों की ज़िंदगी में खुशियाँ और सफलता दोनों लाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य बच्चों के पूरे जीवन को सुंदर, सशक्त और सफल बनाना होना चाहिए। अध्यापकों ने बताया कि जिस प्रकार एक ऊँची इमारत मजबूत नींव पर खड़ी होती है, उसी प्रकार वे हर बच्चे की शैक्षणिक, मानसिक, भावनात्मक और नैतिक नींव को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उनका लक्ष्य बच्चों को केवल अच्छे अंक दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें एक अच्छा इंसान, आत्मविश्वासी व्यक्तित्व और खुशहाल जीवन की दिशा देना है। उन्होंने कहा कि जब बच्चों की राह में कभी भ्रम का कोहरा आता है या लक्ष्य दूर लगने लगते हैं, तब आधारशिला स्कूल के शिक्षक उनके लिए रोशनी बनकर खड़े रहते हैं। सही मार्गदर्शन, धैर्य और विश्वास के साथ वे हर बच्चे का हाथ थामकर उसे उसकी मंज़िल तक पहुँचाने का संकल्प लेते हैं। अध्यापकों ने विश्वास जताया कि कोहरा चाहे जितना भी घना हो, मंज़िल कभी खोती नहीं। बस ज़रूरत होती है एक दीपक की — और आधारशिला स्कूल के शिक्षक वही दीपक बनकर हर बच्चे के साथ खड़े हैं।

