सभी पेरेंट्स के लिए एक मैसेज ■ बच्चे की सफलता का राज — सिर्फ स्कूल नहीं, आपका साथ भी
सभी पेरेंट्स के लिए एक मैसेज ■ बच्चे की सफलता का राज — सिर्फ स्कूल नहीं, आपका साथ भी ■ आपका साथ नहीं, तो स्कूल की मेहनत अधूरी रह जाएगी, बच्चे की पहली क्लास घर से शुरू होती है ■ 6 घंटे स्कूल के… 18 घंटे आपके — जिम्मेदारी किसकी ज्यादा? अमनदीप, आधारशिला स्कूल पेरेंट्स को यह समझना होगा कि बच्चे सिर्फ स्कूल भेज देने से नहीं बनते, बल्कि घर के माहौल से बनते हैं। स्कूल में टीचर पूरे समर्पण के साथ 5–6 घंटे बच्चों को पढ़ाते हैं, उनका मार्गदर्शन करते हैं, उन्हें सही रास्ता दिखाते हैं… लेकिन बच्चा दिन के 18 घंटे घर में बिताता है। अगर उन घंटों में कोई पूछने वाला न हो, पढ़ाई की आदत बनाने वाला न हो, सही-गलत समझाने वाला न हो — तो स्कूल की मेहनत अधूरी रह जाती है। याद रखिए — टीचर रास्ता दिखा सकता है, लेकिन उस रास्ते पर चलाना गार्डियन की जिम्मेदारी होती है। एक एक्टिव गार्डियन वही है जो रोज बच्चे से पूछे “आज क्या नया सीखा?”, उसके साथ बैठे, उसकी आदतों पर ध्यान दे और स्कूल के साथ कदम से कदम मिलाकर चले। जब स्कूल और घर दोनों मिलकर जिम्मेदारी निभाते हैं, तभी बच्चा सच में आगे बढ़ता है, आत्मविश्वासी बनता है और जीवन में सफल होता है। आधारशिला स्कूल के अध्यापक अमनदीप ने कहा आज फैसला हमें करना है — सिर्फ बच्चे को स्कूल भेजना है, या उसके भविष्य के साथ खुद भी चलना है। क्योंकि अच्छा स्कूल मिलना किस्मत है… लेकिन अच्छा गार्डियन बनना हमारी जिम्मेदारी है।

