बाल तरंग – खुशियों का मेला’ (नन्हे कलाकारों की बड़ी पहचान- जो हैं आधारशिला की शान)

माँ के लिए उसके बच्चे से बड़ी कोई ट्रॉफी नहीं होती, लेकिन जब बच्चा ट्रॉफी जीतता है, तो माँ का दिल जीत जाता है। ■■ ‘बाल तरंग – खुशियों का मेला’ (नन्हे कलाकारों की बड़ी पहचान- जो हैं आधारशिला की शान) ■■ आधारशिला दे रहा है नन्हे सपनों को मंच, माताओं के विश्वास को पहचान कहते हैं माँ सबसे पहले अपने बच्चे को सपना देखना सिखाती है— पहली मुस्कान, पहला शब्द, पहला कदम… और दिल में एक खामोश प्रार्थना—“मेरा बच्चा कुछ बने, पहचाना जाए।” लेकिन अक्सर समाज कह देता है— “अभी बहुत छोटा है…” “बाद में देखेंगे…” इसी सोच को बदलने के लिए आधारशिला स्कूल लेकर आ रहा है 2 से 6 वर्ष के नन्हे बच्चों के लिए एक भावनात्मक और ऐतिहासिक बाल उत्सव-“बाल तरंग – खुशियों का मेला” 14 फरवरी,सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक। यह आयोजन सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं, हर उस माँ के सपनों का मंच है जो चाहती है कि उसका बच्चा भी चमके, पहचाना जाए और गर्व का कारण बने। नन्हे बच्चों को मिलेगा बड़ा मंच। इस विशेष बाल उत्सव में 2 से 6 वर्ष के बच्चे— पहली बार मंच पर उतरेंगे अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगे तालियों की गूंज सुनेंगे सोचिए उस पल को— जब बच्चा गले में मेडल डालकर माँ की ओर मुस्कराए और माँ की आँखें कहें— “मेरे बच्चे ने कर दिखाया।” क्योंकि 👉 बचपन लौटकर नहीं आता 👉 और हर बच्चे को मंच नहीं मिलता आधारशिला का विश्वास है — अगर आज बच्चे को अवसर दिया जाए, तो कल वही बच्चा परिवार और समाज का गौरव बनता है।