क्लास में पढ़ाना काफी नहीं… दिल से पढ़ाना जरूरी है

क्लास में पढ़ाना काफी नहीं… दिल से पढ़ाना जरूरी है” सुनीता अरोड़ा,आधारशिला स्कूल हर कोई teacher बन सकता है, लेकिन हर कोई असली teacher नहीं बन पाता। कुछ teachers सिर्फ syllabus पूरा करते हैं, जबकि कुछ बच्चों की ज़िंदगी बदल देते हैं। सच यह है कि teaching अब धीरे-धीरे job बनती जा रही है, जबकि यह एक mission होना चाहिए। क्लास में खड़े होकर पढ़ा देना आसान है, लेकिन हर बच्चे को समझना मुश्किल है। जब किसी बच्चे के marks कम आते हैं, तो उसे weak कह देना आसान होता है, पर कभी-कभी जरूरत बच्चे को नहीं, हमारे पढ़ाने के तरीके को बदलने की होती है। एक teacher की असली पहचान उसके पढ़ाने से नहीं, बल्कि उसके students में आए बदलाव से होती है। जो teacher बच्चों का आत्मविश्वास जगाता है, उन्हें समझता है और हर दिन उन्हें बेहतर बनाने की कोशिश करता है—वही असली teacher कहलाता है। इसलिए सवाल यह नहीं है कि आप teacher हैं या नहीं… सवाल यह है कि आप किस तरह के teacher हैं — job करने वाले या ज़िंदगी बदलने वाले।