असली टीचर किताब से पहले बच्चे का मन पढ़ता है—क्योंकि समझ से ही शिक्षा की असली शुरुआत होती है।” पूजा कालड़ा, आधारशिला स्कूल
असली टीचर किताब से पहले बच्चे का मन पढ़ता है—क्योंकि समझ से ही शिक्षा की असली शुरुआत होती है।” पूजा कालड़ा, आधारशिला स्कूल क्लास में अगर कोई बच्चा सोता हुआ दिखे, ध्यान न दे रहा हो या बार-बार गलती कर रहा हो, तो तुरंत सज़ा देना सबसे आसान रास्ता होता है… लेकिन असली टीचर वही है जो पहले वजह समझने की कोशिश करता है। आधारशिला स्कूल के अध्यापक पूजा कालड़ा के अनुसार हर बच्चे के व्यवहार के पीछे कोई न कोई कहानी छुपी होती है—कभी घर की परेशानी, कभी बीमारी, कभी जिम्मेदारियाँ। एक समझदार टीचर बच्चे को सबके सामने डाँटने के बजाय उसके पास बैठता है, प्यार से पूछता है—“क्या हुआ बेटा?” यही एक सवाल बच्चे का भरोसा जीत लेता है और उसे यह एहसास दिलाता है कि स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि समझ और सहारे की जगह भी है। याद रखिए—हर गलती पर सज़ा देना अनुशासन बना सकता है, लेकिन हर बच्चे को समझना चरित्र और आत्मविश्वास बनाता है। जब टीचर बच्चे की हालत पढ़ना सीख जाता है, तब क्लास में डर नहीं, सम्मान और विश्वास का माहौल बनता है। और यही माहौल बच्चों को सिर्फ अच्छे स्टूडेंट नहीं, बल्कि मजबूत इंसान बनाता है।

